विकेंद्रीकरण

by Major Kulwant Singh | 11 Jul 2021 | Opinion

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पब्लिक की गलती नहीं है ये पिछ्ले 100 साल से राजाओं और मसीहाओं की कहानियों का असर है की संयुक्त किसान मोर्चा(SKM) के निर्णय लेते वक़्त चालीस किसान नेताओं के डिस्कशन के दौरान आपसी मतभेदों को पचा नहीं पा रहे, क्योँकि दिमागी सेटिंग ऐसी कर रखी है की एक मसीहा होना चाहिये आन्दोलन में और वो ताबड़तोड़ दमदार फैसला सुना दे आरपार की लड़ाई का और पब्लिक हू हू हू हूरर करके चार दिन में सब ठप्प होने के बाद आराम से घिसे बेरिंग ले कर घर बैठ जाये।

SKM में किसान नेताओं का एक बड़ा समूह बैठ कर आपसी सलाह मशवरे के बाद फैसले लेता है और वहाँ थोड़ा-बहुत वैचारिक भेद-अन्तर होना लाजमी है, एक तरीके से ये हमारी पंचायती व्यवस्था के मॉडल पर ही चल रहा है। 

ये किसान आन्दोलन किसी मसीहा या राजा का खड़ा किया आन्दोलन नहीं है की एक ही इन्सान का हुक्म चलता हो।

मसीहाओं की आदत से हमें बाहर आना होगा और हमारे पूर्वजों की दी हुई पुरानी सामाजिक व्यवस्था को ले कर आगे बढ़ना होगा :-

1. Collective Decision (सामूहिक निर्णय)
2. Collective Leadership (सामूहिक नेतृत्व)
3. Collective Action (सामूहिक प्रयास या सामूहिक ऐक्शन)

Major Kulwant Singh