नूराकुश्ती-2

by Piyush | 11 Jul 2021 | Opinion

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एक दौर वो था जब यूसुफ खान को भी दिलीप कुमार बन कर रहना पड़ा था तभी सुपर स्टार बन पाए थे।
महाभारत में अर्जुन का किरदार निभाने वाले कलाकार का नाम फिरोज खान से अर्जुन ही लिखा गया था।

दिलीप कुमार से अर्जुन तक इन खान अभिनेताओं के नाम छुपा कर रखने के पीछे शरणार्थियों की मंशा यही थी कि पहले किसान जातियों को हिन्दू क्या है वो तो बताया जाए, उसके बाद ही खान बताने का कुछ फायदा है। 

इसलिए 90 के दशक में रामायण महाभारत दिखा कर राम कृष्ण सेट किये गए और उसके बाद "खान" अभिनेता पर्दे पर लाये गए।
90 के दशक के बाद में अचानक से खान अभिनेताओं की लाइन लगनी शुरू हो गई। 
राजीव ग़ांधी की बलि देकर किसी तरह सरकार बनाई। लेकिन परमानेंट सोलुशन नहीं आया तो बाबरी राम और उसके बाद बम्ब ब्लास्ट होने शुरू हो गए।

बम्ब ब्लास्ट का ये सिलसिला करीब 20 साल चला। तब शरणार्थियों पर भारी दबाव आया कि इसमें भी शहरों में उनके ही लोग मर रहे हैं। तो इसको बन्द किया जाए।
अब कुछ साल से हमले सेना पर होने लगे हैं, क्योंकि वहाँ किसानों के बच्चे ही हैं मरने के लिए।

ये सब क्रम बद्ध तरीके से उल्टा पुल्टा इतिहास लिखना, रामायण महाभारत चलाना, समय समय पर गांधियों की बलि, बाबरी राम, शहरी बम्ब ब्लास्ट और अब सेना पर हमले, सब 1947 के बाद का लगातार सत्ता बनाये रखने का क्रम बद्ध मामला है।

अब आप इन 70 सालों में हम किसान, हमारी खेती और जमीन और आदिवासी को ढूंढ कर दिखाइए ??? इन 70 सालों में इन्होंने अपनी सत्ता की गाड़ी का ईंधन किसान और आदिवासी के खून को जला कर बनाया है।

शरणार्थियों के हाथों की कटपुतली बना हुआ है देस और बर्बाद हो रहा है आदिवासी और किसान। क्योंकि इन परजीवियों के लिए तो सत्ता ही जीविका है, इसके बिना ये nothing हैं।

जोहार 70 साल के विकास क्रम को।

Note:-कोंग्रेस और BJP तक सीमित जीवों को ये पोस्ट समझ नहीं आएगी।

#Saab