फसादी होते वादी

by Major Kulwant Singh | 11 Jul 2021 | Opinion

Image
मार्क्सवादी, माओवादी या लेनिनवादी, और आजकल पुतिनवादी अपने यहाँ के हिसाब से इनके लिये एक कॉमन शब्द #कॉमरेड, इन सब विचारधाराओं को थोपने का मकसद हमें हमारी #गाँव_गण की #कबीलाई सोच से दूर करना रहा है। 

हमारे गाँव गण का सबको साथ लेकर चलने का बेहतरीन सिस्टम था जो मुख्यतः इन तीन बातों पर निर्धारित रहा है :-

1. Collective Decision (सामूहिक निर्णय)
2. Collective Leadership (सामूहिक नेतृत्व)
3. Collective Action (सामूहिक ऐक्शन)

और इसी मुहीम के जरिये हम अपने पूर्वजों की दी हुई समाज की बुनियादी विचारधाराओं की बात छोड़ कर पार्टी विचारधाराओं जैसे कांग्रेस विचारधारा, भाजपा विचारधारा, बसपा विचारधारा आदि पर ही वाद-विवाद करते रहते हैं और उन्हीं में फंस कर रह जाते हैं।

और रही सही कसर पूरी कर दी अलग-अलग ब्राण्ड के ड्रम विचारधाराओं ने।

जब भी खेती-किसानी की बात चलती है तो ऊपर लिखी विचारधाराओं के बन्दे आ कर जो उनको रास आता है वो वाला टैग लगा कर चले जाते हैं ताकि मुहीम फेल हो जाये।

#नोट:- अक्षरज्ञानी लोग मार्क्सवादी, कांग्रेसवादी या भाजपावादी बोलने में मॉडर्न महसूस करते हैं और #कबीलाई_वादी शब्द को पिछड़ेपन की निशानी मानते हैं। कबीला शब्द लिखते ही उनको जितेन्दर की फिल्म का "झींगा ला ला हूरर" वाला गाना याद आ जाता है।